International Everest day..
International Everest Day 29 may 1953
New Zealand's Sir Edmund Hillary And Nepalese Tenzing Norgay
'सर' एडमंड हिलैरी और नेपाल के पर्वतारोही शेरपा तेनज़िंग नोर्गे पहली बार 29 मई,1953 एवरेस्ट फ़तह किया और वहाँ जाने वालो के सपनो को उड़ान और हौसला दिया| उनके बाद एवरेस्ट पर जाने वाले भी उसी सम्मान के पात्र है|
Sir Edmund Hillary
Sir Edmund Hillary :-
(20 जुलाई ,1919 -11 जनवरी,2008) ' सर ' एडमंड शर्मीले स्वभाव के थे |इतने की सितंबर 1953 में अपनी होने वाली पत्नी लुसी मेरी रोस के समक्ष अपने विवाह का प्रस्ताव अपनी सास के जरिये रखा | वे अपने सेलिब्रिटी स्तर को लेकर भी शर्मीले थे वर्ष 1975 में काठमांडू में एक विमान दुर्घटना में पत्नी लुईस और 16 साल की बेटी का निधन हो गया ' सर ' एडमंड ने उनका अंतिम संस्कार नेपाल की बागमती नदी में नेपाली विधि से कराया इस दुर्घटना के बाद वे पूरी तरह टूट गए थे वह अपना दुःख भुलाने के लिए नेपाल के प्राकृतिक सौंदर्य और वहाँ के सीधे सादे लोगो के बीच पहुंच गए 1989 में उन्होंने दूसरा विवाह किया, अपने एक दिंवगत पर्वतारोही पीटर मूलग्रु की विधवा जेन से किया, उनके दो बेटे है पीटर और साराह | उन्होंने अपनी सफलता की 50वी वर्षगाठ वर्ष 2003 में मनाई इसके लिए उनके पास ब्रिटेन की महारानी का निमंत्रण आया, लेकिन उन्होंने निमंत्रण ठुकरा दिया और अपनी सफलता का जश्न गरीब नेपाली शेरपाओ के साथ मनाया | शायद बहुत कम लोग जानते है भारत में दार्जिलिंग के सेंट पॉल्स स्कूल में एक प्राथमिक खंड हिलेरी के नाम पर है हिलेरी ने अपना सारा जीवन कुम्भू ग्लेशियर के पास रहने वाले नेपाली शेरपाओ की सेवा में समर्पित कर दिया था उनके इस योगदान को देखते हुए वर्ष 2003 में उन्हें नेपाल की मानद नागरिकता प्रदान की गई |
पर्वतारोहण का आरम्भ :- हिलेरी बचपन से ही कमजोर सा दिखने वाला एक छात्र था, लेकिन किसी को क्या पता था की ये एक जबरदस्त इच्छाशक्ति का धनी है और मधुमक्खी पालन से जीविकापार्जन में लगा यह बालक ज़िंदगी में कुछ और ही करना चाहते थे | सन 1935 में जब हिलेरी स्कूल के एक पर्वतारोहण दल में शामिल हुए तो कोई नहीं कह सकता था की यह कर सकता है | हिलेरी ने अपनी पर्वतारोहण के शौक की शुरुआत न्यूज़ीलैंड की चोटिया चढ़ने से की थी उसके बाद उन्होंने हिमालय को चुनौती देने कि ठानी | हिमालय पर्वत की शृंखला की 20,000 फुट से अधिक की ऊंचाई की ग्यारह विभिन चोटियां फतह करने के बाद उनमे गजब का आत्मविश्वास पैदा हुआ |
हिलेरी 1951 में एवरेस्ट फतह करके एवरेस्ट रिकनेसेन्स एक्सपीडिशन के सदस्य के रूप में शामिल थे तब उस दल के नेता ' सर ' जान हंट की नजर हिलेरी पर पड़ी | मई में अभियान साऊथ पीक पर पहुंचा तो केवल दो सदस्यों को छोड़कर बाकी सभी थकान के कारण वापिस लौटने को मजबूर हो गए ये दो थे हिलेरी और तेंज़िग नोर्गे इसके बाद 29 मई, 1953 को समुंद्र की सतह से 29,031 फुट ऊंची चोटी को चूमकर वे पर्वतारोहण के क्षेत्र के कालपुरुष हो गए | हिलेरी और उनके साथ एवरेस्ट पर पहुंचे शेरपा तेंज़िग के साथ 15 मिनट बिताए हिलेरी ने तेंज़िग की फोटो ली उन्होंने चोटी पर अपना क्रास उतारकर चढ़ाया बाद में उन्होंने कहा हम नहीं जानते थे की मानव का चोटी पर पहुंचना संभव है |
फतह का जश्न :- हिलेरी की एवरेस्ट फतह की खबर ब्रिटेन में महारानी के अभिषेक के दिन पहुंची थी चूकि ' सर ' हिलेरी न्यूज़ीलैंड के थे और इस तरह वे राष्ट्रमंडल के नागरिक हुए लिहाजा ब्रिटेन में भी उनकी जश्न मनाया एक महानायक होते हुए भी वे जी वन भर बेहद सादगी से रहे अपने जीवन को समर्पित करने वाले ' सर' हिलेरी ने नेपाल में 63 विद्यालओं के अतिरिक्त अनेक अस्पतालों , पुलों व हवाई पट्टी का भी निर्माण करवाया |
जीवन पर एक नजर:- 1980 भारत में न्यूज़ीलैंड के राजदूत रहे 1958 राष्ट्रकुल के एक दल के साथ दक्षिणी धुर्व गए 1985 उत्तरी धुर्व पर पहुंचे 29 मई , 1953 माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले विश्व के पहले पर्वतारोही बने 1977 गंगासागर से गौमुख जेट नौका अभियान | 13 जनवरी , 2008 को ' सर ' हिलेरी ने अंतिम साँस ली 'सर' हिलेरी का पार्थिव शरीर जनता के लिए अंतिम दर्शन के लिए होली ट्रिनिटी कैथड्रल में रखा गया 'सर' हिलेरी का संस्कार पुरे राजकीय सम्मान साथ ऑकलैंड के सेंट मैरिस चर्च में मंगलवार 15 जनवरी को सम्पन हुआ |
बुलंद हिमालयी इरादों के प्रतीक थे ' सर' एडमंड हिलेरी एवरेस्ट फतह करने वाले 'सर' हिलेरी जब दो बार असफल हुए और उन्हें वापिस आना पड़ा तो वे अपने सामने खड़े विशाल पर्वत की चोटी को चेलेंज किया की " में फिर आऊंगा तुम तब भी इतने हे ऊंचे रहोगे क्यूंकि तुम तो पत्थर हो पर मेरा हौसला पीला से कुछ ज्यादा ऊंचा हो जाएगा, क्यूंकि में इंसान हूँ| " और फिर अपनी चुनौती को हर पल याद रख अपने सपनो को उड़ान और हौसला दिया और एवरेस्ट पर विजय पाई |
Tenzing Norgay
Tenzing Norgay:- (29 मई 1914 -9 मई 1986) एक नेपाली पर्वतारोही थे जिन्होंने एवरेस्ट और केदारनाथ के प्रथम मानव चढ़ाई के लिए है न्यूज़ीलैंड के 'सर' एडमंड हिलेरी के साथ वे पहले व्यक्ति है जिन्होंने माउन्ट एवरेस्ट की चोटी पर पहला कदम रखा इसके पहले वे पर्वतारोहण के सिलसिले में वे चित्राल और नेपाल में रहे इनका मूल नाम नांगयाक वंगडी है, जिसका अभिप्राय है धर्म का समृद्ध भाग्यवान अनुयायी|तेनज़िंग नोर्गे का जन्म उत्तरी नेपाल में एक बौद्ध परिवार में हुआ 1933 में वे कुछ महीने के लिए एक भिक्षु बनने बाद नौकरी की तलाश में दार्जिलिंग आ गए तेनज़िंग बौद्ध धर्म के अनुयायी और 1933 में वे भारतीय नागरिक बन गए थे एक ब्रिटिश मिशन शामिल के बाद उन्होंने कई एवरेस्ट मिशनों हिस्सा लिया और अंत में 29 मई 1953 को सफलता मिली
- तेनज़िंग को अपनी सफलताओं के लिए जॉर्ज मैडल भी प्राप्त हुआ|
- 1954 में दार्जिलिंग में 'हिमालय पर्वतारोहण संस्थानकी' की स्थापना के समय उन्हें इसका प्रशिक्षण निर्देशक बना दिया गया|
- तेनज़िंग ने अपूर्व साहस से भारत हिमालय की ऊचाइयों में लिख दिया है,जिसके लिए सदैव यद् किये जाएंगे|
तेंजिंग नोर्गे बचपन में हे एवरेस्ट के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित अपने गांव, जहाँ शेरपाओ का निवास था वे वहाँ से भागकर भारत के पश्चिमी बंगाल दार्जिलिंग में बस गए तेनज़िंग नोर्गे सन 1935 में सर एरिक शिपटन के प्रारंभिक एवरेस्ट सर्वेक्षण अभियान कुली के रूप में शामिल हुए द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद वे कुलियों के संयोजक अथवा सरदार बन गए बन गए इस हैसियत से वह कई अभियानों में साथ गए 1953 में वे सरदार के रूप में ब्रिटिश अभियान पर गए और 'सर' हिलेरी के साथ उन्होंने दूसरा शिखर युगल बनाया दक्षिणी पूर्व क्षेत्र में 8,504 मीटर ऊंचाई पर स्थित अपने तम्बू से निकलकर वह 29 मई को दिन के 11.30 बजे शिखर पर पहुंचे शिखर पर पहुंचकर उन्होंने वहाँ फोटो खींचते और मिल्क केक खाते हुए 15 मिनट बिताए और एक श्रद्धालु बौद्ध की तरह चढ़ावे के रूप में प्रसाद अर्पित किया तेनज़िंग की इस ऐतिहासिक सफलता ने उन्हें इतिहास में दिया|



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