इक मुलाकात
सुना है वो काला सुट पहन कर आए है,
हमे लुभाने के लिए!
कुछ गुलदस्ते पेश किए जाए हमारी तरफ़ से भी,
उनके दिल पर दस्तक लगाने के लिए!!
हल्की सी मुस्कान ओढ़ी है उसने,
अपने रूह पर लगे दाग छुपाने के लिए!
हमने भी घर साफ कर लिया यारों,
कुछ बिखरे पल ना दिखाने के लिए!!
ये मुलाकात उसने,
पसंदीदा चाय पर रखी है!
हम भी अदरक ले आए,
चाय बनाने के लिए!!!
-सुमित
Very nice poem......
ReplyDeleteTry reading my poems also......